श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय को गुड गवर्नेंस अवार्ड का "रिवार्ड





श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय को गुड गवर्नेंस अवार्ड का "रिवार्ड" विश्वविद्यालय के कुलपति श्री राज नेहरू को मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर ने किया अवार्ड से सम्मानित नवाचार, कौशल विकास, इंटीग्रेशन, अन्वेषण, ई-सिस्टम और कुलपति के नए प्रयोग बने गुड गवर्नेंस का आधार, एकीकृत दोहरी शिक्षा मॉडल श्रेणी में मिला अवार्ड पंचकूला। श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय ने सफलता का नया कीर्तिमान रच दिया है। विश्वविद्यालय को एकीकृत दोहरी शिक्षा मॉडल श्रेणी में गुड गर्वनेंस अवार्ड से सम्मानित किया गया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर ने सुशासन दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के कुलपति श्री राज नेहरू को सम्मानित किया और उन्हें यह अवार्ड प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के गवर्नेंस और कुलपति श्री राज नेहरू की कार्यशैली और विजन की सराहना की। कुलसचिव प्रो. आरएस राठौड़, डीन एकेडमिक प्रो. ज्योति राणा, प्रो. सुरेश कुमार, प्रो. निर्मल सिंह, प्रो. रंजीत सिंह व प्रो. आशीष श्रीवास्तव उनके साथ अवार्ड लेने पहुंचे और सभी को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए. श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय कामयाबी के आसमान में निरंतर ऊंची छलांग लगा रहा है। इसी कड़ी में देश की पहली स्किल यूनिवर्सिटी के नाम गुड गवर्नेंस अवार्ड भी दर्ज हो गया है। श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के कुलपति श्री राज नेहरू ने यह अवार्ड प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर के उस विजन को समर्पित किया, जिसके अंतर्गत देश में पहला कौशल विश्वविद्यालय अस्तित्व में आया। श्री नेहरू ने कहा कि श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय का संस्थापक कुलपति होने के नाते मैं अत्यंत गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं कि इतने कम समय में विश्वविद्यालय गुड गवर्नेंस अवार्ड हासिल कर पाया। उन्होंने कहा कि यह सब शिक्षा ढांचे में बड़े बदलाव, नूतन प्रयोग और नवाचार के समावेश से संभव हो पाया है। तकनीक, कौशल और अन्वेषण के आधार पर श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय फलक पर अलग पहचान बनाई है। कुलपति श्री राज नेहरू ने कहा कि श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय ने नवाचार से दोहरे शिक्षा मॉडल को तैयार किया है। यह पूरी तरह से अनोखी प्रणाली है, जिसमें पढ़ाई के साथ-साथ न केवल कमाई की जा सकती है, बल्कि नौकरी के साथ-साथ पढ़ाई भी की जा सकती है। हम इंडस्ट्री और एजुकेशन को साथ -साथ लेकर आए। इतना ही नहीं ऑन द जॉब ट्रेनिंग की अवधारणा पर श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय ने नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। इंटिग्रेशन को कौशल विश्वविद्यालय ने कामयाबी की परिपाटी बनाया है। इंडस्ट्री इंटीग्रेशन विश्वविद्यालय के लिए सफलता के मंत्र की तरह है। यह गुड गवर्नेंस की ही परिणति है। इतना ही नहीं यूनिवर्सिटी ने केजी से लेकर पीजी तक अनोखा मॉडल तैयार किया है, जिसमें इनोवेटिव फीडर स्कूल के माध्यम से स्किल कोर्सेज करवाए जा रहे हैं। श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के प्रयास रंग ला रहे हैं। अब तक 65 फ़ीसदी से ज्यादा प्लेसमेंट इस बात का प्रमाण है । रोजगार के नए मार्ग प्रशस्त हो रहे हैं।



श्री राज नेहरू ने बताया कि देश के 72 नामचीन इंडस्ट्रीज के साथ विश्वविद्यालय का समन्वय है, जिनमें विद्यार्थी अपने कोर्स के दौरान ट्रेनिंग भी करते हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय रिकॉग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग (आरपीएल) की अवधारणा पर काम शुरू किया है, जिसमें अनुभव रखने वाले उन विद्यार्थियों को शैक्षणिक योग्यता प्रदान की जाएगी जो अपने हुनर के माध्यम से बहुत कुछ सीख चुके हैं, लेकिन उनके पास डिग्री नहीं । राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क के अंतर्गत विश्वविद्यालय कई उपलब्धियां अर्जित कर रहा है। विश्वविद्यालय ने ऐसे 34 आयामों पर काम किया है, जो अलग-अलग पाठ्यक्रमों में शामिल होंगे । विश्वविद्यालय ने शॉर्ट टर्म स्किलिंग और इंटर्नशिप उद्योग संचालित मांग के आधार पर डिजाइन किए हैं । विश्वविद्यालय के कुलपति श्री राज नेहरू ने कहा कि विश्वविद्यालय मूल्यांकन और प्रमाणन के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व काम कर रहा है । इस कड़ी में दो वर्षों में एक लाख से भी ज्यादा विद्यार्थियों और युवाओं का एसेसमेंट किया गया है। उन्होंने कहा कि जब हम उपलब्धि अर्जित करते हैं तो भविष्य के लिए बड़े मानक भी गढ़ते हैं। श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय इसके लिए तैयार है।

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